Pre Pregnancy Tests: बेबी प्लान करना सिर्फ एक खुशी भरा फैसला नहीं, बल्कि स्वास्थ्य की जिम्मेदारी भी है। कई बार आवश्यक जानकारी की कमी से गर्भावस्था में खतरे बढ़ जाते हैं और मां-बच्चे दोनों को दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि गर्भधारण से पहले जरूरी टेस्ट और जांच कराना बेहद महत्वपूर्ण है।
गाइनेकोलॉजिस्ट से परामर्श क्यों जरूरी
प्रेग्नेंसी की योजना बनाने वाली महिलाओं को पहले एक विशेषज्ञ डॉक्टर से मिलना चाहिए।
इससे यह पता चलता है कि शरीर गर्भधारण के लिए कितना तैयार है और किन टेस्ट या सप्लीमेंट की आवश्यकता पड़ेगी।
डॉक्टर नियमित ब्लड टेस्ट की सलाह देते हैं, जिसमें हीमोग्लोबिन, थायरायड, शुगर और थैलेसेमिया की जांच शामिल होनी चाहिए।
कम हीमोग्लोबिन गर्भधारण के दौरान गंभीर खतरा बना सकता है। खून की कमी होने पर बच्चे के विकास पर असर पड़ने की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे में डाइट में बदलाव और आयरन सप्लीमेंट मदद कर सकते हैं। ब्लड शुगर की जांच भी उतनी ही जरूरी है। अगर प्रेग्नेंसी से पहले शुगर लेवल ज्यादा है या डायबिटीज का संकेत मिल रहा है, तो समय रहते उसका नियंत्रण बेहद जरूरी है। अन्यथा यह गर्भ में पल रहे बच्चे को प्रभावित कर सकता है।
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थायरायड नियंत्रण में रहना जरूरी (Pre Pregnancy Tests)
थायरायड हार्मोन के असंतुलन से गर्भावस्था में बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास पर असर पड़ सकता है।
इसलिए गर्भधारण से पहले थायरायड टेस्ट कराना और रिपोर्ट के अनुसार इलाज लेना जरूरी है।
दवाओं से इसे आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है।
थैलेसेमिया एक आनुवांशिक बीमारी है, जिसके गंभीर रूप में मरीज को बार-बार खून चढ़ाने की जरूरत होती है।
अगर दोनों माता-पिता थैलेसेमिया माइनर हों, तो बच्चे में थैलेसेमिया मेजर होने का जोखिम बढ़ जाता है।
इसी कारण विवाह या गर्भधारण से पहले यह टेस्ट कराने की सलाह दी जाती है।
रुबेला और चिकनपॉक्स की प्रतिरोधक क्षमता की जांच
विशेषज्ञ बताते हैं कि गर्भधारण से पहले यह पता लगाना महत्वपूर्ण है कि महिला की शरीर में रुबेला और चिकनपॉक्स से लड़ने की पर्याप्त एंटीबॉडी मौजूद हैं या नहीं।
यदि स्तर कम हो तो गर्भधारण से पहले वैक्सीन लेने की सलाह दी जाती है, ताकि संक्रमण का खतरा कम हो।
गर्भधारण की सही शुरुआत तभी होती है जब महिला का शरीर पूर्ण रूप से स्वस्थ और तैयार हो।
थोड़ी सी जागरूकता, समय पर जांच और आवश्यक परामर्श से भविष्य की दिक्कतों से बचा जा सकता है और स्वस्थ मां तथा स्वस्थ बच्चे की संभावना बढ़ जाती है।
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